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मेरी रचनाएँ
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लौट आओ
तुम चली गई हमे छोड़ ये भुला नहीं पाता हूं याद कर अपना बचपन मैं आसूँ बहाता हूं तुम्हारे आँचल के छांव में बीता था मेरा कल अब तुम्हारे...
Kishori Raman
Jan 71 min read
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शरमाने लगें है
जिन्हे घुघरूओं की खनक से चिढ़ थी वे ही आज कोठे पे जाने लगे है जो सभ्यता, संस्कृति की देते थे दुहाई अब खुद ही रास लीला रचाने लगे...
Kishori Raman
Dec 18, 20241 min read
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प्रकाश पर्व दीपावली की ढेरो सारी बधाइयां।
एक दीपावली बाहर की है, एक भीतर की। बाहर की दीपावली आती और चली जाती है। हमे सर्वत्र प्रकाश बढ़ाना है। बाहर का ही नही, भीतर का भी। इस...
Kishori Raman
Oct 31, 20241 min read
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कहाँ ढूंढूगा ?
मेरे पास कल्पित परिकथा है और कुछ नही है खोने के लिए दुख तो है और ये रहेगा भी ये कारण नही है रोने के लिए जब दर्द ही मेरा...
Kishori Raman
Oct 26, 20241 min read
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न्याय नहीं मिलता
कहते हैं कि पंच तो परमेश्वर होता है उसका कोई शत्रु या मित्र नही होता उनसे हम कैसे करें न्याय की उम्मीद जिनमे न्याय करने का...
Kishori Raman
Oct 22, 20241 min read
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उम्मीद करना छोड़ दीजिए
दिन का सूरज जब ढल जायेगा उम्र का एक दिन फिसल जायेगा ये चक्र बस यूं ही चलता रहेगा हम जायेंगे तो कोई और आएगा बहुत जी ली हमने ये ...
Kishori Raman
Oct 12, 20241 min read
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बाप बेटे का रिश्ता
बेटा ज्यों ज्यों बड़ा होता है अपने पैरो पर खड़ा होता है बाप की हिदायतें खलती है बेटे की शिकायतें बढ़ती है बेटे की गलतियों पर बाप...
Kishori Raman
Oct 9, 20241 min read
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ये ज़िंदगी है क्या ?
हमने जो जिया है और जो जी रहे हैं अगर वो ज़िंदगी नही केवल एक दौड़ है तो फिर ज़िंदगी है क्या ? जिसके लिए हम सब आज भी दौड़ रहे हैं जिसने छीन...
Kishori Raman
Oct 4, 20241 min read
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मुलाकात अच्छा लगता है
हमारे आसू बेवफा होते हैं अक्सर ही बहने लगते हैं और रुसवाईयों के किस्से जमाने से कहने लगते हैं उल्फत में हमारे कदम कभी...
Kishori Raman
Oct 2, 20241 min read
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पश्चाताप करेगें ?
भीड़ का हिस्सा बन यहां तमाशा देखते है लोग किसी के साथ कुछ भी हो चुप रहते हैं लोग अन्याय और शोषण देख उन्हे चिंता नही होती उनके साथ...
Kishori Raman
Sep 26, 20241 min read
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अपनी उलझने खुद सुलझाओ
जिन्दगी के हर गम को पी जाना अच्छा है मरने की हसरत लिए जी जाना अच्छा है भले इस दौड़ से हासिल होना कुछ है नही कभी कभी यूं ही यहां...
Kishori Raman
Sep 24, 20241 min read
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जिन्दगी समझना
ज़िंदगी में कभी हार कर देखो किसी से आंखे चार कर देखो जीने का अंदाज बदल जाएगा तुम किसीसे प्यार कर के देखो जिन्दगी किताबों से नही चलती...
Kishori Raman
Sep 22, 20241 min read
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एक प्रश्न
कौन हैं वो लोग जो चाहते हैं कि हम न पढ़े जो चाहते हैं कि पुरानी रवायते न बदले जो चाहते हैं कि हम आपस में लड़े दूसरो के टुकड़ों पर पले कौन...
Kishori Raman
Sep 14, 20241 min read
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गुरुर भी टूटेगा
आज हारे है वो तो कल गुरुर भी टूटेगा पिंजड़े में बंद तोता अब जल्द ही छूटेगा अब समझ में आएगा जन आक्रोश क्या है सपनो के...
Kishori Raman
Sep 2, 20241 min read
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कविता " रंगों में घोल दें "
आज आई है होली लिए खुशियों की झोली देखो रंगों के साथ आई लड़को की टोली कहीं हरे कहीं लाल रंगें हैं सबके गाल कहीं छूटती...
Kishori Raman
Mar 25, 20241 min read
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" विकल्प तलाशना चाहिए "
जब सता का अहंकार लोकतंत्र से बड़ा होता है तब वह इंसानियत के खिलाफ़ खड़ा होता है जनता पाखंड में ही दुखों का निदान ढूंढती है और...
Kishori Raman
Feb 29, 20241 min read
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कविता "सच कहने से डरता है"
हवाओं का रुख देख कर लोग आज चुप हैं पर परेशान वो भी हैं जो कभी बोलते ही नही हम तो ज़ुबान रखते हैं और बोलते ही रहते हैं भले ही हमारा बोलना...
Kishori Raman
Jan 20, 20241 min read
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मुस्कुराना सीख लिया हैं
हमारी तो जिन्दगी गुजर जाती है इंतजार में पर हमे कभी मनचाहा किरदार नही मिलता शोहरत और दौलत तो हमे मिल भी जाते हैं पर सच्चा दोस्त और...
Kishori Raman
Jan 10, 20241 min read
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मां, ओ मेरी मां
इस जिंदगी में तेरी कमी मुझे सताती है लौट आओ मेरी मां मुझे तेरी याद आती है आज जो भी हैं हम सब तेरे ही बदौलत हैं आशीर्वाद आपका मां...
Kishori Raman
Jan 8, 20241 min read
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कविता "गाँधी बाबा कहाँ हो तुम ?"
बापू तेरी प्यार की भाषा सत्य अहिंसाकी परिभाषा समझ नहीं हम पाते है बस झूठा स्वांग रचाते है चारो ओर मची है धूम गाँधी बाबा कहाँ हो...
Kishori Raman
Oct 1, 20231 min read
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