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गुरुर भी टूटेगा

  • Writer: Kishori Raman
    Kishori Raman
  • Sep 2, 2024
  • 1 min read

Updated: Sep 14, 2024


आज  हारे  है  वो  तो

कल  गुरुर  भी  टूटेगा

पिंजड़े  में   बंद  तोता

अब  जल्द  ही  छूटेगा


अब  समझ में आएगा

जन आक्रोश  क्या  है

सपनो के मरनेका गम

भूखों का  दर्द क्या  है


झूठ  को  सच बताना

जनता  को   भरमाना

कैसे रोक सकेगा कोई

अब इंकलाब का आना


जब सता गूंगी बहरी हो

तब आलोचना जरूरी है

मिले  न्याय और गरिमा

संविधान देशका प्रहरी है


न  खुद  पे अहंकार  करें

धरती प्रकृति से प्यार करें

मानवता से बड़ा धर्म नहीं

सच्चाई को  स्वीकार करें


किशोरी रमण 


2 Comments


verma.vkv
verma.vkv
Sep 23, 2024

Bahut sundar rachna.

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verma.vkv
verma.vkv
Sep 13, 2024

सुंदर रचना

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