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ये ज़िंदगी है क्या ?

  • Writer: Kishori Raman
    Kishori Raman
  • Oct 4, 2024
  • 1 min read

हमने जो जिया है

और जो जी रहे हैं

अगर वो ज़िंदगी नही

केवल एक दौड़ है

तो फिर ज़िंदगी है क्या ?

जिसके लिए हम सब

आज भी दौड़ रहे हैं

जिसने छीन लिए

हमारे बचपन

शरारतें और मौज मस्ती

बीत गया अपना

युवावस्था और जवानी

ख्वाब बुनते बुनते

त्याग दिए सारे सुख

नौकरी, तरक्की के लिए

बीबी बच्चो के लिए

दौड़ते रहे हम

मार दिए हमने

खुद को अपनी इच्छाओं और सपनो को।

जिन्दगी के इस पड़ाव पर

पत्नी कहती है

आप बैल के बैल रह गए

बच्चे कहते है

आपने किया ही क्या है ?


जटिल प्रश्न है

अपने लिए कुछ नहीं किया

बच्चों के लिए कुछ नहीं किया

तो हमने किया ही क्या है ?

सब कहते हैं

यहां से जाने का समय आ गया है

तो हमने सारी ज़िंदगी

उस घर के लिए क्यो लगा दी

जो अपना है ही नही

फिर सवाल तो वही है

कि ये ज़िंदगी है क्या ?


किशोरी रमण



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